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अहोई अष्टमी
शरद ऋतु · 1 नवंबर 2026

अहोई अष्टमी

अहोईअष्टमी · संतान रक्षा व्रत

पर्व विवरण
इस वर्ष की तिथि

1 नवंबर 2026

कब

कार्तिक कृष्ण अष्टमी

अवधि

१ दिन

आराध्य देव
पार्वती
परिचय

ॐ अहोई मात्रे नमः

अहोई अष्टमी सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें अहोई की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।


उत्पत्ति

शास्त्र और लोक दोनों में अहोई अष्टमी की जड़ें गहरी हैं। तिथि, कथा और संतान की परंपराएँ मिलकर इस पर्व को अर्थ देती हैं।

क्यों मनाया जाता है

यह पर्व इसलिए मनाया जाता है कि अहोई हमें कर्तव्य, भक्ति और संतुलन सिखाता है। परिवार और समाज एक साथ श्रद्धा व्यक्त करते हैं।

कथा

पुराण-कथाओं में अहोई अष्टमी से जुड़ी कथाएँ अहोई के माध्यम से धर्म की रक्षा और भक्त की रक्षा का संदेश देती हैं।

कहानियाँ और प्रसंग

संतान और अन्य क्षेत्रों में अहोई अष्टमी की लोककथाएँ पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुनाई जाती हैं, जिससे पर्व जीवित रहता है।

विधि एवं परंपरा

स्नान-पूजन, मंत्र जप, व्रत या फलाहार, दीपदान, और अहोई से जुड़े पारंपरिक प्रसाद।

कहाँ मनाया जाता है

मुख्य रूप से संतान; देश के अन्य भागों और प्रवासी समाज में भी श्रद्धा से मनाया जाता है।

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गीता, देवता और पर्व — सरल भाषा में, घर में पढ़े जाने लायक।

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