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त्योहार · पर्व कैलेंडर

हर पर्व के पीछे एक कथा।

मकर संक्रांति से क्षेत्रीय पर्वों तक — प्रत्येक पर्व की उत्पत्ति, कारण, कथा और परंपरा को समझें। कैलेंडर में २०२६–२०२७ की तिथियाँ देखें।

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आगामी पर्व
पितृ पक्ष26 सितंबर 2026 – 9 अक्टूबर 2026
इंदिरा एकादशी6 अक्टूबर 2026
सर्वपितृ अमावस्या9 अक्टूबर 2026
शारदीय नवरात्रि11 अक्टूबर 2026 – 19 अक्टूबर 2026
दुर्गा अष्टमी18 अक्टूबर 2026
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01 · ऋतु

वसंत ऋतु

रंग, नवजीवन और अवतरण के पर्व — माघ से वैशाख तक।

वसंत पंचमी
जनवरी – फरवरी
वसंत पंचमी
माघ शुक्ल पंचमी · १ दिन

वसंत पंचमी विद्या, वाणी, संगीत और कला की देवी सरस्वती का प्रकट दिवस है। इसी दिन से वसंत ऋतु का आरंभ माना जाता है — खेत सरसों के पीले फूलों से भर जाते हैं और भक्त पीले वस्त्र धारण करते हैं।

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होली
मार्च
होली
फाल्गुन पूर्णिमा और चैत्र कृष्ण प्रतिपदा · २ दिन

होली दो दिन का पर्व है — पहली रात होलिका दहन, जिसमें अहंकार और अधर्म का प्रतीक अग्नि में जलता है, और दूसरे दिन धुलंडी, जब सब भेद भुलाकर एक-दूसरे को रंग लगाते हैं।

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राम नवमी
मार्च – अप्रैल
राम नवमी
चैत्र शुक्ल नवमी · १ दिन · चैत्र नवरात्रि का नवम दिवस

राम नवमी विष्णु के सातवें अवतार श्रीराम का जन्मदिवस है, जिनका जन्म अयोध्या में राजा दशरथ और रानी कौसल्या के घर चैत्र शुक्ल नवमी को दोपहर के समय हुआ। यह दिन चैत्र नवरात्रि के नौवें दिन पड़ता है।

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हनुमान जयंती
अप्रैल
हनुमान जयंती
चैत्र पूर्णिमा · १ दिन

हनुमान जयंती अंजना और केसरी के पुत्र, वायुपुत्र हनुमान का जन्मोत्सव है। उत्तर भारत में यह चैत्र पूर्णिमा को मनाई जाती है, और यह दिन बल के साथ विनम्रता तथा भक्ति के साथ सेवा का स्मरण कराता है।

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होलिका दहन
फरवरी – मार्च
होलिका दहन
फाल्गुन पूर्णिमा संध्या · १ रात्रि

होलिका दहन सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें प्रह्लाद की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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शीतला अष्टमी
मार्च
शीतला अष्टमी
चैत्र कृष्ण अष्टमी · १ दिन

शीतला अष्टमी सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें शीतला की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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उगादि
मार्च – अप्रैल
उगादि
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा · १ दिन

उगादि सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें नववर्ष की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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गुड़ी पड़वा
मार्च – अप्रैल
गुड़ी पड़वा
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा · १ दिन

गुड़ी पड़वा सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें गुड़ी की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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चैत्र नवरात्रि
मार्च – अप्रैल
चैत्र नवरात्रि
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा–नवमी · ९ दिन

चैत्र नवरात्रि सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें नवदुर्गा की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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गणगौर
मार्च – अप्रैल
गणगौर
चैत्र शुक्ल तृतीया · १८ दिन तक

गणगौर सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें गौरी की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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मेष संक्रांति
१३ – १४ अप्रैल
मेष संक्रांति
वैशाख · मेष · १ दिन

मेष संक्रांति सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें सूर्य की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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वैशाखी
१३ – १४ अप्रैल
वैशाखी
वैशाख · १ दिन

वैशाखी सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें फसल की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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पुथंडु
१४ अप्रैल
पुथंडु
चित्तिरै १ · १ दिन

पुथंडु सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें नववर्ष की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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विषु
१४ – १५ अप्रैल
विषु
मेडम · १ दिन

विषु सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें विषुकणी की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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पोइला बैशाख
१४ – १५ अप्रैल
पोइला बैशाख
बैशाख १ · १ दिन

पोइला बैशाख सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें नবवर्ष की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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अक्षय तृतीया
अप्रैल – मई
अक्षय तृतीया
वैशाख शुक्ल तृतीया · १ दिन

अक्षय तृतीया सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें अक्षय की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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परशुराम जयंती
अप्रैल – मई
परशुराम जयंती
वैशाख शुक्ल तृतीया · १ दिन

परशुराम जयंती सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें परशु की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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गंगा सप्तमी
अप्रैल – मई
गंगा सप्तमी
वैशाख शुक्ल सप्तमी · १ दिन

गंगा सप्तमी सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें गंगा की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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सीता नवमी
अप्रैल – मई
सीता नवमी
वैशाख शुक्ल नवमी · १ दिन

सीता नवमी सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें सीता की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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नरसिंह जयंती
अप्रैल – मई
नरसिंह जयंती
वैशाख शुक्ल चतुर्दशी · १ दिन

नरसिंह जयंती सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें प्रह्लाद की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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बुद्ध पूर्णिमा
अप्रैल – मई
बुद्ध पूर्णिमा
वैशाख पूर्णिमा · १ दिन

बुद्ध पूर्णिमा सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें गौतम की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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आमलकी एकादशी
फरवरी – मार्च
आमलकी एकादशी
फाल्गुन शुक्ल एकादशी · १ दिन

आमलकी एकादशी सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें आँवला की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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पापमोचनी एकादशी
मार्च
पापमोचनी एकादशी
चैत्र कृष्ण एकादशी · १ दिन

पापमोचनी एकादशी सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें मोचन की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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कामदा एकादशी
मार्च – अप्रैल
कामदा एकादशी
चैत्र शुक्ल एकादशी · १ दिन

कामदा एकादशी सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें कामना की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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वरूथिनी एकादशी
अप्रैल
वरूथिनी एकादशी
वैशाख कृष्ण एकादशी · १ दिन

वरूथिनी एकादशी सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें रक्षा की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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मोहिनी एकादशी
अप्रैल – मई
मोहिनी एकादशी
वैशाख शुक्ल एकादशी · १ दिन

मोहिनी एकादशी सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें मोहिनी की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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अपरा एकादशी
मई
अपरा एकादशी
ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी · १ दिन

अपरा एकादशी सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें पुण्य की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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उगादि पच्चडी स्मृति
मार्च – अप्रैल
उगादि पच्चडी स्मृति
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा · १ दिन

उगादि पच्चडी स्मृति सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें पच्चडी की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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चेटी चंड
मार्च – अप्रैल
चेटी चंड
चैत्र शुक्ल द्वितीया · १ दिन

चेटी चंड सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें झूलेलाल की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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सजीबू नोंगमा पानबा
मार्च – अप्रैल
सजीबू नोंगमा पानबा
सजीबू · १ दिन

सजीबू नोंगमा पानबा सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें मणिपुर की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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गुड़ी पड़वा रंगोली उत्सव
मार्च – अप्रैल
गुड़ी पड़वा रंगोली उत्सव
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा · १ दिन

गुड़ी पड़वा रंगोली उत्सव सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें तोरण की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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हनुमान जयंती (दक्षिण)
दिसंबर / क्षेत्रानुसार
हनुमान जयंती (दक्षिण)
मार्गशीर्ष/अन्य परंपरा · १ दिन

हनुमान जयंती (दक्षिण) सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें हनुमान की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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बसंत उत्सव
जनवरी – फरवरी
बसंत उत्सव
माघ शुक्ल पंचमी · १ दिन

बसंत उत्सव सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें रबींद्रनाथ की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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02 · ऋतु

वर्षा ऋतु

गुरु, स्नेह और भक्ति के पर्व — आषाढ़ से भाद्रपद तक।

गुरु पूर्णिमा
जुलाई
गुरु पूर्णिमा
आषाढ़ पूर्णिमा · १ दिन

गुरु पूर्णिमा उस दिन का नाम है जब शिष्य अपने गुरु के प्रति कृतज्ञता प्रकट करता है। इसे व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं, क्योंकि इसी दिन वेदों के संपादक और महाभारत के रचयिता महर्षि वेद व्यास का जन्म हुआ था।

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रक्षा बंधन
अगस्त
रक्षा बंधन
श्रावण पूर्णिमा · १ दिन

रक्षा बंधन में बहन भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बाँधती है और भाई उसकी रक्षा का वचन देता है। यह सूत्र केवल धागा नहीं, स्नेह और उत्तरदायित्व का बंधन है।

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कृष्ण जन्माष्टमी
अगस्त – सितंबर
कृष्ण जन्माष्टमी
भाद्रपद कृष्ण अष्टमी · रोहिणी नक्षत्र · २ दिन · जन्माष्टमी और नंदोत्सव

जन्माष्टमी विष्णु के आठवें अवतार श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव है, जिनका जन्म मथुरा के कारागार में कंस के भय के बीच अर्धरात्रि को हुआ। भक्त उपवास रखकर मध्यरात्रि तक जागते हैं और जन्म के क्षण पर शंख, घंटी और कीर्तन से उत्सव मनाते हैं।

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गणेश चतुर्थी
अगस्त – सितंबर
गणेश चतुर्थी
भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी · १० दिन · अनंत चतुर्दशी तक

गणेश चतुर्थी विघ्नहर्ता गणेश का जन्मोत्सव है। दस दिन तक घरों और पंडालों में उनकी प्रतिमा स्थापित होती है, और अनंत चतुर्दशी को "गणपति बप्पा मोरया, पुढच्या वर्षी लवकर या" के उद्घोष के साथ विसर्जन होता है।

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वट सावित्री
मई – जून
वट सावित्री
ज्येष्ठ अमावस्या · १ दिन

वट सावित्री सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें सावित्री की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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शनि जयंती
मई – जून
शनि जयंती
ज्येष्ठ अमावस्या · १ दिन

शनि जयंती सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें शनि की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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गंगा दशहरा
मई – जून
गंगा दशहरा
ज्येष्ठ शुक्ल दशमी · १० दिन तक

गंगा दशहरा सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें गंगा की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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निर्जला एकादशी
मई – जून
निर्जला एकादशी
ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी · १ दिन

निर्जला एकादशी सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें भीम की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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वट पूर्णिमा
जून
वट पूर्णिमा
ज्येष्ठ पूर्णिमा · १ दिन

वट पूर्णिमा सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें वट की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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स्नान यात्रा
जून
स्नान यात्रा
ज्येष्ठ पूर्णिमा · १ दिन

स्नान यात्रा सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें पुरी की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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रथ यात्रा
जून – जुलाई
रथ यात्रा
आषाढ़ शुक्ल द्वितीया · ९ दिन तक

रथ यात्रा सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें रथ की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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देव शयनी एकादशी
जून – जुलाई
देव शयनी एकादशी
आषाढ़ शुक्ल एकादशी · १ दिन

देव शयनी एकादशी सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें चातुर्मास की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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हरियाली तीज
जुलाई – अगस्त
हरियाली तीज
श्रावण शुक्ल तृतीया · १ दिन

हरियाली तीज सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें तीज की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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नाग पंचमी
जुलाई – अगस्त
नाग पंचमी
श्रावण शुक्ल पंचमी · १ दिन

नाग पंचमी सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें नाग की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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वरलक्ष्मी व्रत
जुलाई – अगस्त
वरलक्ष्मी व्रत
श्रावण शुक्ल शुक्रवार · १ दिन

वरलक्ष्मी व्रत सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें लक्ष्मी की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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ओणम
अगस्त – सितंबर
ओणम
चिंगम · थिरुवोणम · १० दिन

ओणम सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें महाबली की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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गायत्री जयंती
अगस्त
गायत्री जयंती
श्रावण पूर्णिमा · १ दिन

गायत्री जयंती सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें गायत्री की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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कजरी तीज
अगस्त
कजरी तीज
भाद्रपद कृष्ण तृतीया · १ दिन

कजरी तीज सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें कजरी की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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हरतालिका तीज
अगस्त – सितंबर
हरतालिका तीज
भाद्रपद शुक्ल तृतीया · १ दिन

हरतालिका तीज सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें हरतालिका की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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ऋषि पंचमी
अगस्त – सितंबर
ऋषि पंचमी
भाद्रपद शुक्ल पंचमी · १ दिन

ऋषि पंचमी सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें सप्तर्षि की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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विश्वकर्मा पूजा
सितंबर
विश्वकर्मा पूजा
कन्या संक्रांति · १ दिन

विश्वकर्मा पूजा सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें औजार की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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राधा अष्टमी
अगस्त – सितंबर
राधा अष्टमी
भाद्रपद शुक्ल अष्टमी · १ दिन

राधा अष्टमी सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें राधा की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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अनंत चतुर्दशी
सितंबर
अनंत चतुर्दशी
भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी · १ दिन

अनंत चतुर्दशी सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें अनंत धागा की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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पांडव निर्जला स्मृति
मई – जून
पांडव निर्जला स्मृति
ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी · १ दिन

पांडव निर्जला स्मृति सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें भीमसेन की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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योगिनी एकादशी
जून – जुलाई
योगिनी एकादशी
आषाढ़ कृष्ण एकादशी · १ दिन

योगिनी एकादशी सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें योग की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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कामिका एकादशी
जुलाई – अगस्त
कामिका एकादशी
श्रावण कृष्ण एकादशी · १ दिन

कामिका एकादशी सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें सावन की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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श्रावण पुत्रदा एकादशी
अगस्त
श्रावण पुत्रदा एकादशी
श्रावण शुक्ल एकादशी · १ दिन

श्रावण पुत्रदा एकादशी सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें संतति की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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अजा एकादशी
अगस्त – सितंबर
अजा एकादशी
भाद्रपद कृष्ण एकादशी · १ दिन

अजा एकादशी सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें क्षमा की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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पार्श्व एकादशी
सितंबर
पार्श्व एकादशी
भाद्रपद शुक्ल एकादशी · १ दिन

पार्श्व एकादशी सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें पार्श्व की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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03 · ऋतु

शरद ऋतु

शक्ति, विजय और दीपों के पर्व — आश्विन से कार्तिक तक।

शारदीय नवरात्रि
सितंबर – अक्टूबर
शारदीय नवरात्रि
आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से नवमी · ९ रात्रि

नवरात्रि देवी शक्ति के नौ रूपों की उपासना की नौ रातें हैं। प्रत्येक दिन नवदुर्गा का एक स्वरूप पूजित होता है, और दसवें दिन विजयादशमी के रूप में असत्य पर सत्य की विजय मनाई जाती है।

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दशहरा · विजयादशमी
सितंबर – अक्टूबर
दशहरा · विजयादशमी
आश्विन शुक्ल दशमी · १ दिन

विजयादशमी नवरात्रि के बाद का दसवाँ दिन है, जब राम ने रावण का वध किया और देवी दुर्गा ने महिषासुर का। संध्या को रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले जलाए जाते हैं।

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करवा चौथ
अक्टूबर – नवंबर
करवा चौथ
कार्तिक कृष्ण चतुर्थी · १ दिन · सूर्योदय से चंद्रोदय तक

करवा चौथ में विवाहित स्त्रियाँ पति की दीर्घायु और कुशलता के लिए सूर्योदय से चंद्रोदय तक निर्जल व्रत रखती हैं। "करवा" मिट्टी का पात्र है और "चौथ" चतुर्थी — इसी से पर्व का नाम बना।

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दीपावली
अक्टूबर – नवंबर
दीपावली
कार्तिक अमावस्या · ५ दिन

दीपावली अर्थात् दीपों की पंक्ति — वर्ष की सबसे अंधेरी रात को असंख्य दीप जलाकर मनाया जाने वाला पर्व। यह पाँच दिन चलता है: धनतेरस, नरक चतुर्दशी, लक्ष्मी पूजन, गोवर्धन पूजा और भाई दूज।

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भाई दूज
अक्टूबर – नवंबर
भाई दूज
कार्तिक शुक्ल द्वितीया · १ दिन

भाई दूज दीपावली का पाँचवाँ और अंतिम दिन है, जब बहन भाई को तिलक कर उसकी दीर्घायु की कामना करती है और भाई उसके घर आकर भोजन करता है। इसका शास्त्रीय नाम यम द्वितीया है।

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छठ पूजा
अक्टूबर – नवंबर
छठ पूजा
कार्तिक शुक्ल षष्ठी · ४ दिन

छठ पूजा सूर्य और उनकी शक्ति छठी मैया को समर्पित चार दिन का कठिन व्रत है, जिसमें व्रती छत्तीस घंटे निर्जल रहकर नदी या तालाब के जल में खड़े होकर डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देते हैं।

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पितृ पक्ष
सितंबर – अक्टूबर
पितृ पक्ष
भाद्रपद पूर्णिमा–अमावस्या · १५ दिन

पितृ पक्ष सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें श्राद्ध की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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सर्वपितृ अमावस्या
सितंबर – अक्टूबर
सर्वपितृ अमावस्या
आश्विन अमावस्या · १ दिन

सर्वपितृ अमावस्या सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें श्राद्ध की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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दुर्गा अष्टमी
सितंबर – अक्टूबर
दुर्गा अष्टमी
आश्विन शुक्ल अष्टमी · १ दिन

दुर्गा अष्टमी सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें कुमारी पूजन की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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महा नवमी
सितंबर – अक्टूबर
महा नवमी
आश्विन शुक्ल नवमी · १ दिन

महा नवमी सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें अयोध की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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शरद पूर्णिमा
अक्टूबर
शरद पूर्णिमा
आश्विन पूर्णिमा · १ रात्रि

शरद पूर्णिमा सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें खीर की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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अहोई अष्टमी
अक्टूबर – नवंबर
अहोई अष्टमी
कार्तिक कृष्ण अष्टमी · १ दिन

अहोई अष्टमी सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें अहोई की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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धनतेरस
अक्टूबर – नवंबर
धनतेरस
कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी · १ दिन

धनतेरस सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें धन्वंतरि की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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नरक चतुर्दशी
अक्टूबर – नवंबर
नरक चतुर्दशी
कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी · १ दिन

नरक चतुर्दशी सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें नरकासुर की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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गोवर्धन पूजा
अक्टूबर – नवंबर
गोवर्धन पूजा
कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा · १ दिन

गोवर्धन पूजा सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें गोवर्धन की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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देवोत्थान एकादशी
नवंबर
देवोत्थान एकादशी
कार्तिक शुक्ल एकादशी · १ दिन

देवोत्थान एकादशी सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें प्रबोधिनी की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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तुलसी विवाह
नवंबर
तुलसी विवाह
कार्तिक शुक्ल द्वादशी · १ दिन

तुलसी विवाह सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें तुलसी की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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कार्तिक पूर्णिमा
नवंबर
कार्तिक पूर्णिमा
कार्तिक पूर्णिमा · १ दिन

कार्तिक पूर्णिमा सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें काशी की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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कालभैरव जयंती
नवंबर
कालभैरव जयंती
कार्तिक कृष्ण अष्टमी · १ दिन

कालभैरव जयंती सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें भैरव की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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इंदिरा एकादशी
सितंबर – अक्टूबर
इंदिरा एकादशी
आश्विन कृष्ण एकादशी · १ दिन

इंदिरा एकादशी सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें पितर की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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पापांकुशा एकादशी
अक्टूबर
पापांकुशा एकादशी
आश्विन शुक्ल एकादशी · १ दिन

पापांकुशा एकादशी सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें अंकुश की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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रमा एकादशी
अक्टूबर – नवंबर
रमा एकादशी
कार्तिक कृष्ण एकादशी · १ दिन

रमा एकादशी सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें रमा की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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गोवत्स द्वादशी
अक्टूबर – नवंबर
गोवत्स द्वादशी
कार्तिक कृष्ण द्वादशी · १ दिन

गोवत्स द्वादशी सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें गोवधू की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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अन्नकूट
अक्टूबर – नवंबर
अन्नकूट
कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा · १ दिन

अन्नकूट सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें अन्न की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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भाई फोटा
अक्टूबर – नवंबर
भाई फोटा
कार्तिक शुक्ल द्वितीया · १ दिन

भाई फोटा सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें तिलक की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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काली पूजा
अक्टूबर – नवंबर
काली पूजा
कार्तिक अमावस्या · १ रात्रि

काली पूजा सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें काली की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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जगद्धात्री पूजा
नवंबर
जगद्धात्री पूजा
कार्तिक शुक्ल नवमी · १ दिन

जगद्धात्री पूजा सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें जगद्धात्री की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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देव दीपावली
नवंबर
देव दीपावली
कार्तिक पूर्णिमा · १ रात्रि

देव दीपावली सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें गंगा घाट की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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त्रिपुरी पूर्णिमा
नवंबर
त्रिपुरी पूर्णिमा
कार्तिक पूर्णिमा · १ दिन

त्रिपुरी पूर्णिमा सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें त्रिपुर की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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कार्तिगै दीपम
नवंबर – दिसंबर
कार्तिगै दीपम
कृत्तिका दीपम · १ दिन

कार्तिगै दीपम सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें तिरुवन्नामलई की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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04 · ऋतु

शिशिर ऋतु

सूर्य, तप और जागरण के पर्व — पौष से फाल्गुन तक।

मकर संक्रांति
१४ – १५ जनवरी
मकर संक्रांति
माघ · सूर्य का मकर राशि में प्रवेश · १ दिन

मकर संक्रांति वह दिन है जब सूर्य धनु से मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उत्तरायण आरंभ होता है। यह भारत का एकमात्र प्रमुख पर्व है जो सौर गणना पर आधारित है, इसलिए इसकी तिथि हर वर्ष लगभग स्थिर रहती है।

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महाशिवरात्रि
फरवरी – मार्च
महाशिवरात्रि
फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी · १ रात्रि · चार प्रहर

महाशिवरात्रि वर्ष की वह रात्रि है जो पूरी तरह शिव को समर्पित है। भक्त दिन भर उपवास रखते हैं और रात के चारों प्रहर जागकर शिवलिंग पर अभिषेक करते हैं — यह पर्व उत्सव से अधिक जागरण और भीतर की स्थिरता का साधन है।

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पौष पूर्णिमा
दिसंबर – जनवरी
पौष पूर्णिमा
पौष पूर्णिमा · १ दिन

पौष पूर्णिमा शीत ऋतु की पवित्र पूर्णिमा है जब भक्त पवित्र नदियों में स्नान करते हैं और दान करते हैं।

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संकट चौथ
जनवरी
संकट चौथ
पौष कृष्ण चतुर्थी · १ दिन

संकट चौथ गणेश जी का व्रत है जिसमें भक्त चंद्र दर्शन के बाद ही भोजन करते हैं और संकट निवारण की प्रार्थना करते हैं।

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पोंगल
१४ – १७ जनवरी
पोंगल
थाई मास · ४ दिन

पोंगल सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें सूर्य की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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मौनी अमावस्या
जनवरी
मौनी अमावस्या
पौष अमावस्या · १ दिन

मौनी अमावस्या सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें मौन की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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रथ सप्तमी
जनवरी – फरवरी
रथ सप्तमी
माघ शुक्ल सप्तमी · १ दिन

रथ सप्तमी सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें सूर्य रथ की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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भीष्म अष्टमी
जनवरी – फरवरी
भीष्म अष्टमी
माघ शुक्ल अष्टमी · १ दिन

भीष्म अष्टमी सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें भीष्म की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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माघ पूर्णिमा
जनवरी – फरवरी
माघ पूर्णिमा
माघ पूर्णिमा · १ दिन

माघ पूर्णिमा सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें माघ स्नान की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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विवाह पंचमी
नवंबर – दिसंबर
विवाह पंचमी
मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी · १ दिन

विवाह पंचमी सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें जनकपुर की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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गीता जयंती
नवंबर – दिसंबर
गीता जयंती
मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी · १ दिन

गीता जयंती सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें कुरुक्षेत्र की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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दत्तात्रेय जयंती
दिसंबर
दत्तात्रेय जयंती
मार्गशीर्ष पूर्णिमा · १ दिन

दत्तात्रेय जयंती सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें दत्त की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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लोहड़ी
१३ जनवरी
लोहड़ी
पौष · लोहड़ी · १ रात्रि

लोहड़ी सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें अग्नि की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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थैपूसम
जनवरी – फरवरी
थैपूसम
थाई पूर्णिमा · १ दिन

थैपूसम सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें कावड़ी की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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मोक्षदा एकादशी
नवंबर – दिसंबर
मोक्षदा एकादशी
मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी · १ दिन

मोक्षदा एकादशी सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें गीता की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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पौष पुत्रदा एकादशी
दिसंबर – जनवरी
पौष पुत्रदा एकादशी
पौष शुक्ल एकादशी · १ दिन

पौष पुत्रदा एकादशी सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें संतति की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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षट्तिला एकादशी
जनवरी
षट्तिला एकादशी
पौष कृष्ण एकादशी · १ दिन

षट्तिला एकादशी सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें तिल की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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विजया एकादशी
फरवरी
विजया एकादशी
फाल्गुन कृष्ण एकादशी · १ दिन

विजया एकादशी सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें विजय की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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उत्पन्ना एकादशी
नवंबर – दिसंबर
उत्पन्ना एकादशी
मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी · १ दिन

उत्पन्ना एकादशी सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें उत्पत्ति की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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चंपा षष्ठी
नवंबर – दिसंबर
चंपा षष्ठी
मार्गशीर्ष शुक्ल षष्ठी · १ दिन

चंपा षष्ठी सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें खंडोबा की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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धनु संक्रांति
दिसंबर
धनु संक्रांति
धनु संक्रांति · १ दिन

धनु संक्रांति सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें धनुर्मास की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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वैकुंठ एकादशी
दिसंबर – जनवरी
वैकुंठ एकादशी
धनु/मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी · १ दिन

वैकुंठ एकादशी सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें वैकुंठ की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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माட்டு पोंगल
१५ – १६ जनवरी
माட்டு पोंगल
थाई · १ दिन

माட்டு पोंगल सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें गौ की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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कनुमा
१६ जनवरी
कनुमा
पुष्य · १ दिन

कनुमा सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें पशु की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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भोगी
१३ – १४ जनवरी
भोगी
थाई · १ दिन

भोगी सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें पुरानी वस्तुएँ की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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सीता विवाह उत्सव
नवंबर – दिसंबर
सीता विवाह उत्सव
मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी · १ दिन

सीता विवाह उत्सव सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें जनकपुर की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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तिरुवातिरा
दिसंबर – जनवरी
तिरुवातिरा
धनु · तिरुवातिरा · १ दिन

तिरुवातिरा सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें पार्वती की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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कन्नी पोंगल
१७ जनवरी
कन्नी पोंगल
थाई · १ दिन

कन्नी पोंगल सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें भ्रमण की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।

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120 पर्वों की यह सूची भारतीय संस्कृति के वार्षिक चक्र का परिचय है।

Sanatan Gyan

गीता, देवता और पर्व — सरल भाषा में, घर में पढ़े जाने लायक।

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गीता ज्ञानदेवतात्योहारकैलेंडर
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