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गीता ज्ञान · श्रीमद्भगवद्गीता
जीवन के हर प्रश्न का एक शाश्वत उत्तर।
श्रीकृष्ण और अर्जुन के संवाद में छिपे ज्ञान को पढ़ें, समझें और अपने जीवन में उतारें।
“
सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज
सभी धर्मों को छोड़कर मेरी शरण में आओ।
१८.६६
१८ अध्याय
अध्याय अनुसार ज्ञान
अठारह अध्यायों में जीवन, कर्तव्य, भक्ति और आत्मज्ञान की संपूर्ण यात्रा।
प्रसिद्ध श्लोक
जीवन बदलने वाले श्लोक

अध्याय 2 · श्लोक ४७
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कर्मण्येवाधिकारस्ते
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥
तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करने में है, उसके फलों में कभी नहीं।
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अध्याय 6 · श्लोक ०५
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उद्धरेदात्मनात्मानं
उद्धरेदात्मनात्मानं नात्मानमवसादयेत्। आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः॥
मनुष्य को अपने द्वारा अपना उत्थान करना चाहिए, स्वयं को गिराना नहीं।
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अध्याय 4 · श्लोक ०७
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यदा यदा हि धर्मस्य
यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥
जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब मैं प्रकट होता हूँ।
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