
अध्याय 2 · सांख्य योग · ४७
कर्मण्येवाधिकारस्ते
श्लोक का मनन
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥
सरल अर्थ
तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करने में है, उसके फलों में कभी नहीं।
भावा��्थ
श्रीकृष्ण हमें परिणाम की चिंता छोड़कर पूरी निष्ठा से अपना कर्तव्य करने का मार्ग दिखाते हैं।
जीवन में उदाहरण
विद्यार्थी परीक्षा के परिणाम के बजाय रोज़ ईमानदारी से पढ़ाई पर ध्यान दे।
