Sanatan Gyan
गीता ज्ञानदेवतात्योहारकैलेंडरहमारे बारे में
Englishगीता ज्ञान
गीता ज्ञानदेवतात्योहारकैलेंडरहमारे बारे में
← त्योहारों पर लौटें← कैलेंडर पर लौटें
उगादि
वसंत ऋतु · 19 मार्च 2026

उगादि

युगादि · दक्षिण का नववर्ष

पर्व विवरण
इस वर्ष की तिथि

19 मार्च 2026

कब

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा

अवधि

१ दिन

क्षेत्रीय नोट

आंध्र, तेलंगाना, कर्नाटक में उगादि; महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा।

आराध्य देव
ब्रह्मा
परिचय

ॐ ब्रह्मणे नमः

उगादि सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें नववर्ष की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।


उत्पत्ति

शास्त्र और लोक दोनों में उगादि की जड़ें गहरी हैं। तिथि, कथा और उगादि पच्चडी की परंपराएँ मिलकर इस पर्व को अर्थ देती हैं।

क्यों मनाया जाता है

यह पर्व इसलिए मनाया जाता है कि नववर्ष हमें कर्तव्य, भक्ति और संतुलन सिखाता है। परिवार और समाज एक साथ श्रद्धा व्यक्त करते हैं।

कथा

पुराण-कथाओं में उगादि से जुड़ी कथाएँ नववर्ष के माध्यम से धर्म की रक्षा और भक्त की रक्षा का संदेश देती हैं।

कहानियाँ और प्रसंग

उगादि पच्चडी और अन्य क्षेत्रों में उगादि की लोककथाएँ पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुनाई जाती हैं, जिससे पर्व जीवित रहता है।

विधि एवं परंपरा

स्नान-पूजन, मंत्र जप, व्रत या फलाहार, दीपदान, और नववर्ष से जुड़े पारंपरिक प्रसाद।

कहाँ मनाया जाता है

मुख्य रूप से उगादि पच्चडी; देश के अन्य भागों और प्रवासी समाज में भी श्रद्धा से मनाया जाता है।

← पिछला पर्व
सजीबू नोंगमा पानबा
अगला पर्व →
उगादि पच्चडी स्मृति
Sanatan Gyan

गीता, देवता और पर्व — सरल भाषा में, घर में पढ़े जाने लायक।

पढ़ें
गीता ज्ञानदेवतात्योहारकैलेंडर
स्थल
हमारे बारे मेंनिजता नीतिनियमसंपर्क
© 2026 Sanatan Gyanज्ञान बाँटने से बढ़ता है।