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गुड़ी पड़वा रंगोली उत्सव
वसंत ऋतु · 19 मार्च 2026

गुड़ी पड़वा रंगोली उत्सव

गुडीपाडवा · गुड़ी और तोरण

पर्व विवरण
इस वर्ष की तिथि

19 मार्च 2026

कब

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा

अवधि

१ दिन

आराध्य देव
ब्रह्मा
परिचय

ॐ ब्रह्मणे नमः

गुड़ी पड़वा रंगोली उत्सव सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें तोरण की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।


उत्पत्ति

शास्त्र और लोक दोनों में गुड़ी पड़वा रंगोली उत्सव की जड़ें गहरी हैं। तिथि, कथा और महाराष्ट्र की परंपराएँ मिलकर इस पर्व को अर्थ देती हैं।

क्यों मनाया जाता है

यह पर्व इसलिए मनाया जाता है कि तोरण हमें कर्तव्य, भक्ति और संतुलन सिखाता है। परिवार और समाज एक साथ श्रद्धा व्यक्त करते हैं।

कथा

पुराण-कथाओं में गुड़ी पड़वा रंगोली उत्सव से जुड़ी कथाएँ तोरण के माध्यम से धर्म की रक्षा और भक्त की रक्षा का संदेश देती हैं।

कहानियाँ और प्रसंग

महाराष्ट्र और अन्य क्षेत्रों में गुड़ी पड़वा रंगोली उत्सव की लोककथाएँ पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुनाई जाती हैं, जिससे पर्व जीवित रहता है।

विधि एवं परंपरा

स्नान-पूजन, मंत्र जप, व्रत या फलाहार, दीपदान, और तोरण से जुड़े पारंपरिक प्रसाद।

कहाँ मनाया जाता है

मुख्य रूप से महाराष्ट्र; देश के अन्य भागों और प्रवासी समाज में भी श्रद्धा से मनाया जाता है।

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सजीबू नोंगमा पानबा
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गीता, देवता और पर्व — सरल भाषा में, घर में पढ़े जाने लायक।

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