परिचय
येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः
रक्षा बंधन में बहन भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बाँधती है और भाई उसकी रक्षा का वचन देता है। यह सूत्र केवल धागा नहीं, स्नेह और उत्तरदायित्व का बंधन है।
उत्पत्ति
रक्षासूत्र की परंपरा वैदिक है। श्रावण पूर्णिमा को ब्राह्मण अपना यज्ञोपवीत बदलते हैं और श्रावणी उपाकर्म करते हैं, तथा पुरोहित यजमान की कलाई पर रक्षा बाँधकर मंत्र पढ़ता है। भविष्य पुराण में इंद्र की कथा आती है — वृत्रासुर से युद्ध के पूर्व बृहस्पति के निर्देश पर इंद्राणी शची ने इंद्र की कलाई पर रक्षासूत्र बाँधा और वे विजयी हुए। मूलतः यह अभिमंत्रित सुरक्षा का सूत्र था, जो कालांतर में भाई-बहन के स्नेह पर्व के रूप में लोकप्रिय हुआ।
क्यों मनाया जाता है
इस पर्व का भाव यह है कि रक्षा माँगना दुर्बलता नहीं और रक्षा देना अधिकार नहीं, उत्तरदायित्व है। बहन का बाँधा सूत्र भाई को स्मरण कराता है कि उसके बल का उपयोग किसी के सम्मान की रक्षा में होना चाहिए। यह संबंध जन्म तक सीमित नहीं — सैनिकों, वृक्षों, नदियों और पड़ोसियों को भी रक्षासूत्र बाँधे जाते हैं। श्रावण पूर्णिमा का चुनाव भी सार्थक है; वर्षा के बाद खेती और यात्राएँ आरंभ होती थीं, और यह सूत्र मंगलकामना के साथ विदा देने का चिह्न था।
कथा
महाभारत की कथा सबसे प्रिय है। शिशुपाल के वध के समय कृष्ण के हाथ की अंगुली कट गई और रक्त बहने लगा। द्रौपदी ने बिना क्षण गँवाए अपनी साड़ी का किनारा फाड़कर उनकी अंगुली पर बाँध दिया। कृष्ण ने उस स्नेह को ऋण मानकर उसकी रक्षा का वचन दिया — और जब कौरवों की सभा में द्रौपदी का चीरहरण हुआ, तब वही एक टुकड़ा अनंत वस्त्र बनकर उनकी लज्जा का रक्षक बना। दूसरी कथा वामन अवतार की है — जब विष्णु ने वामन रूप में राजा बलि से तीन पग भूमि माँगकर उन्हें पाताल भेजा और स्वयं वचनवश उनके पास रहने लगे, तब लक्ष्मी ने साधारण स्त्री बनकर बलि की कलाई पर राखी बाँधी और भाई मानकर उपहार में अपने पति को माँग लिया।
कहानियाँ और प्रसंग
यमुना और यम की कथा में बहन के स्नेह से अमरता का वरदान मिलता है, जिसे भाई दूज में भी स्मरण किया जाता है। संतोषी माता की कथा में बहन की श्रद्धा और भाई की सहायता का प्रसंग आता है। इतिहास में मेवाड़ की रानी कर्णावती ने हुमायूँ को राखी भेजकर सहायता माँगी थी, और सिकंदर की पत्नी ने पुरु को रक्षासूत्र भेजकर पति के प्राणों की भिक्षा माँगी — युद्धभूमि में पुरु ने उठा हुआ हाथ रोक लिया। रवींद्रनाथ ठाकुर ने १९०५ में बंग-भंग के विरोध में हिंदू और मुसलमानों को एक-दूसरे की कलाई पर राखी बाँधने का आह्वान किया, जिससे यह सूत्र एकता का प्रतीक भी बना। महाराष्ट्र और तटीय भारत में यही दिन नारली पूर्णिमा है, जब मछुआरे समुद्र को नारियल अर्पित करते हैं।
विधि एवं परंपरा
थाली में राखी, रोली, अक्षत, दीप और मिठाई; भाई को तिलक कर आरती और राखी बाँधना; भाई का उपहार और रक्षा का वचन; घर में खीर, घेवर और नारियल के व्यंजन; ब्राह्मणों द्वारा यज्ञोपवीत परिवर्तन और श्रावणी उपाकर्म।
कहाँ मनाया जाता है
सम्पूर्ण भारत और नेपाल — उत्तर तथा पश्चिम भारत में प्रमुख; महाराष्ट्र और गोवा में नारली पूर्णिमा; दक्षिण में अवनि अवित्तम या उपाकर्म; नेपाल में जनै पूर्णिमा।

