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भाई दूज
शरद ऋतु · 10 नवंबर 2026

भाई दूज

यमद्वितीया · बहन के तिलक का वरदान

पर्व विवरण
इस वर्ष की तिथि

10 नवंबर 2026

कब

कार्तिक शुक्ल द्वितीया

अवधि

१ दिन

आराध्य देव
कृष्णलक्ष्मी
परिचय

ॐ यमाय नमः

भाई दूज दीपावली का पाँचवाँ और अंतिम दिन है, जब बहन भाई को तिलक कर उसकी दीर्घायु की कामना करती है और भाई उसके घर आकर भोजन करता है। इसका शास्त्रीय नाम यम द्वितीया है।


उत्पत्ति

इस पर्व की जड़ यम और उनकी बहन यमुना की कथा में है, जिसका उल्लेख पुराणों में यम द्वितीया के रूप में मिलता है। मृत्यु के देवता यम को उनकी बहन यमी अर्थात् यमुना बार-बार अपने घर बुलाती रहीं, और वे कार्तिक शुक्ल द्वितीया को आए। इसी स्मृति में यह तिथि भाई के अपनी बहन के घर जाने की तिथि बनी। यही भाव रक्षा बंधन से भिन्न है — रक्षा बंधन में बहन भाई के पास जाती है, भाई दूज में भाई बहन के आँगन में आता है।

क्यों मनाया जाता है

भाई दूज का संदेश है कि संबंध निभाने के लिए चलकर जाना पड़ता है। बहन का तिलक केवल शुभकामना नहीं, यम के वरदान का स्मरण है — इस दिन बहन के हाथ से तिलक पाने वाला भाई अकाल मृत्यु और यम-यातना के भय से मुक्त माना जाता है। भाई अपनी सामर्थ्य के अनुसार उपहार देकर यह स्वीकार करता है कि बहन का मान उसका उत्तरदायित्व है। इसी दिन यमुना स्नान का भी विधान है, क्योंकि यमुना को यह वरदान प्राप्त है कि उनमें स्नान करने वाला यम-भय से मुक्त होता है।

कथा

यमुना अपने भाई यम से बहुत स्नेह करती थीं और चाहती थीं कि वे उनके घर आकर भोजन करें, पर मृत्यु के देवता अपने कार्यभार से कभी अवकाश न ले पाते। बार-बार निमंत्रण के बाद कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यम अपनी बहन के द्वार पहुँचे। यमुना ने स्नान कर, द्वार सजाकर, उनका तिलक किया, आरती की और अपने हाथों से भोजन कराया। इस स्नेह से यम इतने प्रसन्न हुए कि उन्होंने वर माँगने को कहा। यमुना ने अपने लिए कुछ न माँगते हुए कहा — आप प्रति वर्ष इसी दिन मेरे घर आएँ, और जो भाई इस दिन अपनी बहन के हाथ का तिलक और भोजन पाए, वह यम-यातना से मुक्त रहे। यम ने यह वरदान दे दिया, और तभी से यह तिथि यम द्वितीया कहलाती है।

कहानियाँ और प्रसंग

दूसरी कथा कृष्ण की है। नरकासुर का वध करने के बाद कृष्ण अपनी बहन सुभद्रा के पास पहुँचे; सुभद्रा ने दीप और पुष्प से आरती कर उनका तिलक किया, मिष्ठान खिलाया और विजय की मंगलकामना की — यह भी इस पर्व का आधार माना जाता है। कहीं-कहीं इसे चित्रगुप्त पूजा के साथ मनाया जाता है, जब कायस्थ समाज कलम-दवात का पूजन करता है। भारत के भिन्न भागों में इसके नाम भी भिन्न हैं — महाराष्ट्र और गोवा में भाऊबीज, बंगाल में भाईफोंटा, नेपाल में भाई टीका, और उत्तर भारत में भैया दूज। बंगाल में बहन भाई के मस्तक पर चंदन, काजल और दही का फोंटा लगाकर उपवास तोड़ती है।

विधि एवं परंपरा

बहन द्वारा चौक पूरकर भाई को आसन देना; रोली, अक्षत और चंदन का तिलक तथा आरती; नारियल या सुपारी भेंट करना; भाई के लिए उसका प्रिय भोजन और मिष्ठान; भाई का उपहार और रक्षा का वचन; यमुना स्नान और यम-चित्रगुप्त पूजन।

कहाँ मनाया जाता है

सम्पूर्ण भारत और नेपाल — उत्तर भारत में भैया दूज, महाराष्ट्र में भाऊबीज, बंगाल में भाईफोंटा, बिहार में गोधन तथा चित्रगुप्त पूजा, नेपाल में भाई टीका।

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गीता, देवता और पर्व — सरल भाषा में, घर में पढ़े जाने लायक।

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