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होलिका दहन
वसंत ऋतु · 2 मार्च 2026

होलिका दहन

होलिकादहन · होली की पूर्व संध्या

पर्व विवरण
इस वर्ष की तिथि

2 मार्च 2026

कब

फाल्गुन पूर्णिमा की पूर्व संध्या

अवधि

१ रात्रि

आराध्य देव
विष्णुकृष्ण
परिचय

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

होलिका दहन सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें प्रह्लाद की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।


उत्पत्ति

शास्त्र और लोक दोनों में होलिका दहन की जड़ें गहरी हैं। तिथि, कथा और हिरण्याकशिपु की परंपराएँ मिलकर इस पर्व को अर्थ देती हैं।

क्यों मनाया जाता है

यह पर्व इसलिए मनाया जाता है कि प्रह्लाद हमें कर्तव्य, भक्ति और संतुलन सिखाता है। परिवार और समाज एक साथ श्रद्धा व्यक्त करते हैं।

कथा

पुराण-कथाओं में होलिका दहन से जुड़ी कथाएँ प्रह्लाद के माध्यम से धर्म की रक्षा और भक्त की रक्षा का संदेश देती हैं।

कहानियाँ और प्रसंग

हिरण्याकशिपु और अन्य क्षेत्रों में होलिका दहन की लोककथाएँ पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुनाई जाती हैं, जिससे पर्व जीवित रहता है।

विधि एवं परंपरा

स्नान-पूजन, मंत्र जप, व्रत या फलाहार, दीपदान, और प्रह्लाद से जुड़े पारंपरिक प्रसाद।

कहाँ मनाया जाता है

मुख्य रूप से हिरण्याकशिपु; देश के अन्य भागों और प्रवासी समाज में भी श्रद्धा से मनाया जाता है।

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गीता, देवता और पर्व — सरल भाषा में, घर में पढ़े जाने लायक।

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