परिचय
ॐ सरस्वत्यै नमः
वसंत पंचमी विद्या, वाणी, संगीत और कला की देवी सरस्वती का प्रकट दिवस है। इसी दिन से वसंत ऋतु का आरंभ माना जाता है — खेत सरसों के पीले फूलों से भर जाते हैं और भक्त पीले वस्त्र धारण करते हैं।
उत्पत्ति
सरस्वती की उपासना ऋग्वेद जितनी प्राचीन है, जहाँ वे नदी और वाग्देवी दोनों रूपों में वंदित हैं। पौराणिक मान्यता है कि ब्रह्मा ने सृष्टि रची, पर वह मूक और निर्जीव थी। तब उन्होंने अपने कमंडल से जल छिड़का और उससे वीणाधारिणी सरस्वती प्रकट हुईं, जिन्होंने सृष्टि को स्वर, लय और वाणी दी। यह दिन माघ शुक्ल पंचमी था, इसलिए इसे सरस्वती का प्रादुर्भाव दिवस कहा जाता है।
क्यों मनाया जाता है
यह पर्व इस विश्वास पर आधारित है कि ज्ञान ही सबसे बड़ा धन है और उसका आरंभ शुभ मुहूर्त में होना चाहिए। इसी दिन छोटे बच्चों का अक्षर-आरंभ या विद्यारंभ कराया जाता है — उनकी उँगली पकड़कर पहला अक्षर लिखवाया जाता है। विद्यार्थी, संगीतकार, नर्तक और लेखक अपने वाद्य, पुस्तकें और कलम देवी के चरणों में रखकर आशीर्वाद लेते हैं। पीला रंग वसंत, सूर्य और बुद्धि के प्रकाश का प्रतीक है।
कथा
कथा है कि जब ब्रह्मा ने सरस्वती को उत्पन्न किया, तब उनके सौंदर्य से मोहित होकर वे स्वयं व्याकुल हो गए, और सरस्वती जिस दिशा में जातीं ब्रह्मा उसी ओर मुख कर लेते — इसी से उनके चार मुख बने। सरस्वती ने उन्हें यह स्मरण कराया कि वे विद्या की धारा हैं, भोग की वस्तु नहीं; तब ब्रह्मा ने उन्हें शक्ति और गुरु के रूप में स्वीकार किया। इस कथा का भाव यह है कि ज्ञान की उपासना संयम और श्रद्धा से होती है, आसक्ति से नहीं।
कहानियाँ और प्रसंग
वसंत पंचमी कामदेव और रति से भी जुड़ी है — इस दिन प्रकृति में प्रेम और सौंदर्य का संचार माना जाता है, और कई स्थानों पर मदन उत्सव मनाया जाता है। ब्रज में यही दिन होली के चालीस दिन के उत्सव का आरंभ है, जब मंदिरों में पहली बार गुलाल उड़ाया जाता है। बंगाल, ओडिशा और असम में यह सरस्वती पूजा है, जहाँ पंडालों में देवी की प्रतिमा स्थापित होती है और अगले दिन विसर्जन होता है। पंजाब और हरियाणा में इसे बसंत के आगमन और पतंगों के साथ जोड़ा जाता है।
विधि एवं परंपरा
पीले वस्त्र और पीले पुष्प; सरस्वती वंदना और "या कुन्देन्दुतुषारहारधवला" स्तोत्र; पुस्तक, वीणा और कलम का पूजन; केसरिया भात, बूंदी और मीठे चावल का भोग; बच्चों का अक्षर-आरंभ।
कहाँ मनाया जाता है
सम्पूर्ण भारत — बंगाल, बिहार, ओडिशा और असम में सरस्वती पूजा; उत्तर भारत में बसंत पंचमी; ब्रज में होली का शुभारंभ।

